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सपरून घाटी (Saproon Valley)

सपरून घाटी (Saproon Valley) सोलन की सपरून घाटी  बहुत उपजाऊ है। ये घाटी बेमौसमी फसल के विख्यात है। यहां पलम, खुमानी, और टमाटर की फसलों का अधिकता से उत्पादन होता है। सपरून की मुख्य फसलें हैं- गेहूं, मक्का, चौलाई, कोदा तथा चावल। यहां के खेत सीढ़िनुमा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे होने के कारण यहां आर्थिक संपन्नता है।

रूढ़ा गांव (Information about Rudha village) Ram Temple in Solan(HP)

      रूढ़ा गांव (Rudha Village)   विश्व की सबसे ऊंची राम परिवार की अष्टधातु से बनी मूर्तियों की स्थापना का गौरव हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के एक गांव 'रुढा' को प्राप्त हुआ। इन मूर्तियों की ऊंचाई साढ़े 10 फुट है।  इन मूर्तियों को  राजस्थान से मंगवाया गया है। इन्हें बनाने में साढ़ें 6 करोड़ का खर्च आया। मूर्तियों को बनाने में 10 क्विंटल तांबा, 4 क्विंटल चांदी, 5 किलो सोना तथा 2.20 कैरेट हिरा इस्तेमाल हुआ है।मूर्तियों की स्थापना 4 फरवरी, 2016 ई॰ में सम्पन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी का नाम श्री अमर महाराज है।

लाॅरेंस / सनावर स्कूल (Lawrence /Sanawar School, Kasauli)

लाॅरेंस / सनावर स्कूल (Lawrence / Sanawar School) लाॅरेंस स्कूल सनावर सोलन के कसौली मे स्थित है। इसे 1847ई॰ में  सर हेनरी लाॅरेंस और उनकी पत्नी हेनोरिया द्वारा शुरू किया गया था।  ये एक सह-शिक्षा और आवासीय यानि Co-education & Boarding स्कूल है।  यह विश्व का सबसे पुराना आवासीय सह- शिक्षा का विद्यालय समझा जाता है।  स्कूल जिस पहाड़ी पर स्थापित है उसका नाम सनावर रखा गया है। स्कूल का आदर्श वाक्य है- कभी हार मत मानो ( Never Give In). ये स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में अपना काफी अच्छा योगदान देता है।

चायल (Chail) , Highest Cricket ground, Military School and Maa Temple

चायल (Chail)  चायल, जिला सोलन के उप-मंडल कंडाघाट के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र है। चायल मुख्यत अपने विश्व के सबसे ऊंचे क्रिकेट ग्राउंड के लिए विख्यात है। यहां भारत का प्रथम मिलिट्री स्कूल भी है।        इसके अलावा यह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भी है, यहां एक चोटी पर मां का सिद्ध मंदिर है, जो काली टिब्बा के नाम से जाना जाता है।  चायल सोलन से 40 किमी. दूर है , यहां जाने के  लिए सोलन -शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर कंडाघाट तक जाना होगा और फिर कंडाघाट से चायल के लिए 25 किमी. के लिए कंडाघाट चायल रोड पर जाना होगा। चायल  शिमला और सिरमौर के अन्य मार्गों से भी पहुंचा जा सकता है। 

कसौली (Kasauli information in hindi)

                      कसौली (Kasauli)     कसौली,  जिला सोलन का एक छोटा सा पर्वतीय स्थान है, परन्तु इस छोटे से स्थान में कईं एतिहासिक और दर्शनीय स्थान है। कसौली के मुख्य स्थान  (Viewable Places)   गिलबर्ट ट्रेल( Gilbert Trail)              गिलबर्ट ट्रेल, कसौली की आकर्षक प्रकृति को देखने के लिए एक  मार्ग है।  सन-सेट प्वाइंट (Sun-set Point)                   यहां से सूर्यास्त का अद्भुत नज़ारा देखा जा सकता है।       मंकी प्वाइंट (Monkey Point)                इस स्थान पर  भगवान् हनुमान जी का मंदिर और उनके पैर का निशान है। क्राइस्ट चर्च (Christ Church)         ...

डगशाई जेल (Dagshai Jail/ Prison), Solan

डगशाई जेल (Dagshai Prison) सोलन के डगशाई में, 1849 ई॰ में  ₹ 72,873/- में बनी जेल में 54 कैदी कोठरियां हैं। इनमें वे एकांत कोठरियां भी शामिल हैं जो कैदियों को यातनाएं देने के लिए बनाई गईं थी, इन कोठरियों में ना तो प्रकाश के आने की कोई व्यवस्था थी और ना ही इनमें कोई व्यक्ति आराम से खड़ा हो सकता है क्योंकि ये आकार में बहुत छोटी हैं।    जेल की अन्य कोठरियों में 1×2 फुट के रोशनदान हैं, जहां से हवा और रोशनी का आवागमन होता था। यह सुनिश्चित किया गया था कि कोई कैदी जेल से ना भाग पाए।आज भी  डगशाई जेल का ढांचा वैसे का वैसा ही है। डगशाई छावनी की शिल्पकला और ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए, सेना ने जेल की ऐतिहासिक संगता को दर्शाने के लिए  एक संग्रहालय को 13 अक्तूबर, 2011 में लोगों को अर्पित किया।   मार्ग (Route)    डगशाई जाने के लिए कुम्हारहट्टी और धर्मपुर से मार्ग जाता है। 

शूलिनी माता मंदिर / शूलिनी मेला (Shoolini Temple / Fair), Solan Information in Hindi

शूलिनी माता मंदिर / शूलिनी मेला( Maa Shoolini  Temple/Shoolini Fair )  शूलिनी माता मंदिर(Maa Shoolini Temple)-      शूलिनी माता के  नाम से सोलन का नामकरण हुआ है। माता शूलिनी बघाट रियासत के शासकों की कुल देवी मानी जाती है, बघाट के शासकों ने ही शूलिनी माता के मंदिर का निर्माण किया था। सोलन के शूलिनी माता के मंदिर में माता के अतिरिक्त शिरगुल देवता और माली देवता इत्यादि की प्रतिमाएं हैं।  लोकमत के अनुसार शूलिनी माता 7 बहनों में से एक है। अन्य बहनें हिंगलाज माता, जेठी ज्वाला जी, लुगासना देवी, नैना देवी और तारा देवी हैं। सोलन‌ नगर बघाट रियासत की राजधानी हुआ करती थी। शूलिनी मेला (Shoolini Fair)-   जनश्रुति के अनुसार बघाट के शासक अपनी कुल देवी की प्रसन्नता के लिए प्रतिवर्ष मेलें का आयोजन करते थे। प्राचीन काल में मेला एक दिन का हुआ करता था,जो आषाढ़ मास के दूसरे रविवार को मनाया जाता था और आज भी मनाया जाता है, परन्तु सन् 1972 में सोलन जिला के अस्तित्व में आने के बाद इस मेले के  सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के ल...